जय बिनसर महादेव
Mahatma Gandhi's words about Veer Chandra Singh Garhwali were" If I had one more Chandra Singh Garhwali, then India would have become Independent much earlier. "

स्वर्गीय श्री आनंद सिंह गुसाई जी का जन्म 13 जून 1951 को हुआ था। गुसाई जी नैनी डांडा विकासखंड (धुमाकोट) इलाके के रहने वाले थे I आपने जीवनभर उत्तराखंड की सामाजिक समस्याओं के निराकरण के लिए संघर्ष किया। जानकारों के अनुसार, युवा अवस्था से ही आप उत्तराखंड राज्य के हितों पर समर्पित थे और उत्तराखंड राज्य आंदोलन में पूरी सक्रियता और कर्मठता से जुड़े रहे। राज्य गठन में अग्रणीय भूमिका निभाने वाली उत्तराखंड क्रांति दल से भी आप जुड़े रहे। उत्तराखंड में सामाजिक जन जागरण के लिए आप पूरे उत्तराखंड का भ्रमण करते थे।

90 के दशक में जब आप चौथान क्षेत्र पहुंचे तो आपको प्रस्तावित बैजरों, चौखाल, बुंगीधार मोटर मार्ग निर्माण में वनभूमि संरक्षण अधिनियम 1927 की रुकावटों का पता चला। उस दौर में राज्य में सभी स्थानों को मोटरमार्ग से जोड़ने की योजना चल रही थी। परन्तु चौथान पट्टी के लिए प्रस्तावित मोटर मार्ग पर पापतोली, बांकुड़ाधार का हिस्सा सरकारी वनक्षेत्र में आता था। जिसकी वजह से यह मोटर मार्ग वर्षों से लंबित था। सामाजिक, आर्थिक और पर्यटन की दृष्टि से यह मोटर मार्ग चौथान के लिए बहुत महत्वपूर्ण था।

वास्तव में उस समय तक चौथान आने के लिए यातायात का कोई साधन नहीं था। प्रमुख मोटर मार्गों जैसे थलीसैण, देघाट, बैजरों, नागचुलाखाल आने के लिए चौथानवासियों को कई किलोमीटर का पद यात्रा करनी पड़ती थी। प्रदेश से लोगों को चौथान आने के लिए देघाट और यदा कदा घड़घाट तक ही बस सुविधा मिलती थी और उसके बाद उन्हें अपने गांवों को पहुँचने के लिए लगभग 25 किलो मीटर पैदल चलना पड़ता था। जो रोगियों, बच्चों और बुजर्गों के लिए बड़ा कष्टदायक था। मोटरमार्ग अभाव के कारण चौथान पट्टी क्षेत्र राज्य के बाकि हिस्सों से अलग-थलग पड़ा हुआ था। जिससे सरकारी योजनाओं एवं सुविधाओं को यहाँ पहुँचने में बहुत समय लगता था।

मोटरमार्ग अभाव के चलते, पहाड़ी जनता की पीड़ा को गुसाईं जी भली भांति समझते थे। आपने इससे पहले भी उत्तराखंड में मोटरमार्ग सुविधा के लिए संघर्ष किया था। आपकी अगुवाई में ही 1988-1990 के मध्य चौथान क्षेत्र को बैजरों, चौखाल, बुंगीधार मोटरमार्ग से जोड़ने के लिए जनांदोलन चलाया गया। इस ऐतिहासिक आंदोलन में चौथान के गणमान्य व्यक्तियों के साथ प्रत्येक ग्राम सभा ने गुसाईं जी का भरपूर साथ दिया। चौथान हक़ हकूक के इस संघर्ष में बांकुड़ा से लेकर बैजरों तक विशाल रैली भी निकाली गई और लोक निर्माण विभाग के कार्यलय का घेराव किया गया। अंत में गुसाईं जी की निर्भीकता और चौथान समाज की एकजुटता को देखते हुए वन विभाग को भी अपने पांव पीछे खींचने पड़े। युवाओं के साहस, महिलाओं के सहयोग और गुसाईं जी के नेतृत्व में चीड़ के पेड़ों को काटकर चौथान, बांकुड़ा, पापतोली मोटर मार्ग का रास्ता प्रशस्त किया गया। इस मोटर मार्ग को बनाने में चौथान के प्रतेक गांव ने श्रमदान किया।

गुसाई जी के साथ इस आंदोलन में चौथान के समस्त 72 गांव चौथान के जनमानस शामिल थे। जनता द्वारा बनाई गई इस मोटर मार्ग को जनता रोड के नाम से भी जाना गया। सबसे अच्छी बात यह थी कि इस मोटर मार्ग को बनाने में जितने पेड़ कटे थे, उससे अधिक पौधों को वन भूमि में लगाया गया। गुसाईं जी की जन्मभूमि चौथान पट्टी नहीं थी, फिर भी उन्होंने इसे अपनी कर्मभूमि बनाया। गुसाईं जी का 42 साल की युवाअवस्था में ही निधन हो गया ।

बैजरों, चौखाल, बूंगीधार मोटर मार्ग की बदौलत आज चौथान के हज़ारों निवासियों के जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन हुआ है, और चौथान क्षेत्र में यातायात सहज, सुलभ और सुगम हुआ है। आपको श्रद्धांजलि देते हुए, चौथान के सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा 16 दिसंबर 2010 में बुंगीधार में गुसाईं जी की प्रतिमा का अनावरण किया। यह बहुत बड़ी चर्चा और चिंतन का विषय है कि गुसाईं जी के निजी जीवन के बारे में बहुत कम जानकारी सार्जनिक तौर पर उपलब्ध है। चौथान के लिए उनके त्याग और संघर्ष को नमन करते हुए, समिति द्वारा रचित उनकी यह जीवनी, इस दिशा में एक छोटा सा प्रयास है। आपके क्रांतिकारी सहयोग के लिए वीर चंद्र सिंह गढ़वाली चौथान विकास समिति आपको शत-शत नमन करती है। जय हिंद।

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